इस एहसान फरामोशों के मेले में, एक दिल सच्चा सा चाहते है, माँ के जैसा निस्वार्थ प्रेम करने वाला, एक साथी हम सच्चा चाहते हैं।

चीख़ती है चिल्लाती भी है, रोती भी है बिलखती भी है, जब मेरी माँ ग़ुस्सा हो जाती है, तो अपनी आँखों में आँसू लिए चुप-चाप सो जाती है।

यकीनन ईश्वर से बिलकुल कम नहीं है मेरी मां जनाब, लफ्ज़ कम पड़ जाएंगे उनके एहसान लिखने लिखने।

जिस एक लफ्ज़ से है मेरी दुनिया सारी, मुझे मेरा वो जहाँ फिर लौटा दे, चाहे तो मेरी जिंदगी लेले ऐ खुदा, बस मुझे मेरी प्यारी माँ लौटा दे।

तेरे ऎहसास से हम ग़म भूला जाते है, तेरे होने से मेरे दुख सारे मिट जाते है, तेरी प्यारी मुस्कुराहट से दिल भर जाते है, तुझे दुनिया की हर ख़ुशी दूं यहीं मेरी तमन्ना है।

न इन आँखों में अब कोई ख्वाब है किसी के, न इस दिल को अब किसी की ख्वाइश है, तेरी गोद में कटे माँ मेरा अब हर लम्हा, बस इतनी सी ही मेरी फरमाइश है।

बिना बताये ही वो हर बात जान जाती है, वो माँ ही तो अपनी दोस्त बन जाती है, गर हो कोई मुसीबत आये तो ढाल बन जाती है, वो माँ ही जो दुआ बन जाती है।

जनाब मां का नाम लिखकर एक ग़ज़ल बना रहा हूं मै, हां एक असल खुदा की सी शक़ल बना रहा हूं मैं, उसने उपवास रखे है मेरे लिए कई बार, उसी के हिस्से की बची हुई रोटियां खा रहा हूं मैं।

मैं क्यों न लिखूं मेरी माँ पर जिसने मुझें लिखा हैं, मैंने इस दुनिया में सबसे पहले माँ बोलना ही सीखा हैं।

माँ तेरी करामात से है ज़िन्दगी मेरी, माँ तेरी खिदमत में है ये बंदगी मेरी, माँ तेरी हर दुआ में है फ़िक्र मेरी, माँ तेरे कदमो में है ये जन्नत मेरी

बाबा के चले जाने के बाद माँ को पूरे घर की ज़िम्मेदारी उठाते देखा है, कुछ इस तरहा मैंने माँ को भी मेरा बाप बनते देखा है।

सब कुछ लेने पर भी समर्पण करने का हुनर, हमें अपने “पिता” से ही सीखना चाहिए, और सब कुछ हार कर भी ये जग जित लेने का हुनर, एक “माता” से बेहतर कोई नहीं सीखा सकता है।

जिस एक लफ्ज़ से है मेरी दुनिया सारी, मुझे मेरा वो जहाँ वापस लौटा दे, चाहे बदले में मेरी जिंदगी लेले खुदा, बस मुझे मेरी माँ वापस लौटा दे।

जिस एक लफ्ज़ से है मेरी दुनिया सारी, मुझे मेरा वो जहाँ वापस लौटा दे, चाहे बदले में मेरी जिंदगी लेले खुदा, बस मुझे मेरी माँ वापस लौटा दे।

बताया नही कभी उसे हमने अपने दिल का हाल फ़िर भी सब समझती है, बचा लेती है जो हर बार मेरी डूबती हुईं कश्ती हाँ मेरी माँ ही वो हस्ती है।

परवाने की तरह हर दम बस आग मे ही जलते हैं , जो नज़रों से गिर गये वो मुश्किल से ही संभलते हैं, ख़तरा और हादसात मेरे नज़दीक नहीं आते, अपने माँ के कदम चूमकर हम घर से जो निकलते हैं।